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जज की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, पूछा क्या उनका धर्म उनकी राह में रोड़ा है?

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पिछले काफी दिनों से अनेक विवादों के चलते सुप्रीम कोर्ट विपक्ष के घेरे में है. अब उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के. एम. जोसेफ की नियुक्ति को मंजूरी ना मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति सही नहीं है। वही इस मामले पर कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़ी जुंग छिड गई है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति ना होने पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने 100 वकीलों के हस्ताक्षर के साथ एक याचिका दायर की है। इसमें इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकने के लिए भी कहा गया है। जयसिंह का कहना है कि इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति गलत नहीं है लेकिन दोनों की नियुक्ति एक साथ होनी चाहिए थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश मानते हुए सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को जज बनाने को अपनी मंजूरी दे दी थी। जिसके बाद इसकी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब माना जा रहा है कि वो शुक्रवार (27 अप्रैल) को शपथ ले सकती हैं। वही केंद्र सरकार अभी भी अपने रुख पर बरकरार है। चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया है कि किसी जज की नियुक्ति पर स्टे वारंट देना सोच से भी परे है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी पूरा प्रोसेस होने दिया जाए, कोलेजियम के जरिए पूरी प्रक्रिया होगी।
अब इस मामले पर कांग्रेस और भाजपा आपने सामने है।

रिपोर्ट के अनुसार कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले से ही न्यायपालिका में दखल देने का काम करती रही है। उन्होंने कहा कि जजों और न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करना कांग्रेस के इतिहास में रहा है। फिर चाहे वह जस्टिस हेगड़े, जस्टिस शेलट और जस्टिस ग्रोवर का ही मामला क्यों ना हो। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जज HR खन्ना जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान फैसला दिया था, उन्होंने चीफ जस्टिस का पद ठुकरा दिया था। वहीं इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी का फैसला भी उनके निर्णय के बाद ही लिया था। उन्होंने कहा कि आज की सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और मैं भी हैं जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान लड़ाई लड़ी थी. हमारी सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है।

वही इस मामले पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि हम लगातार कह रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है। कानून कहता है कि सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम कहता है वही होगा, जबकि सरकार चाहती है कि अगर उनके मन मुताबिक नहीं हुआ तो कोलेजियम की सिफारिशों को नजरअंदाज करेगी और उसे मंजूरी नहीं देगी। कपिल सिब्बल ने कहा कि बीजेपी कहती है कि देश बदल रहा है, लेकिन हम कहते हैं कि देश बदल चुका है।आज सरकार न्यायपालिका के साथ जो बर्ताव कर रही है, वह पूरा देश जानता है. सरकार की मंशा साफ है कि वह जस्टिस जोसेफ को जज नहीं बनने देंगे। सिब्बल ने कहा कि सरकार कोलेजियम के हिसाब से नहीं चलना चाहती है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जैसा कि कानून कहता है, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामले में कॉलेजियम की सिफारिश बाध्यकारी और अंतिम होता है। क्या मोदी सरकार कानून से ऊपर है? उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा है, जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति क्यों रोकी गई? क्या उनका राज्य या धर्म या फिर उत्तराखंड मामले में दिया गया उनका फैसला उनकी राह में रोड़ा है?” बता दें कि जस्टिस के एम जोसेफ ने अपने फैसले में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के निर्णय को 2016 में गलत करार दिया था।