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गोरखपुर: ऑक्सीजन की कमी से बच्चो की मौत मामले में अरेस्ट हुए डॉ कफील को मिली ज़मानत

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पिछले साल अगस्त में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आते ही गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से करीब 60 मासूमों की मौत हो गई थी। इस मामले में जेल में बंद आरोपी डॉ. कफील खान को आज यानि बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। वह घटना के बाद से फरार चल रहे थे और यूपी एसटीएफ ने उन्हें लखनऊ से गिरफ्तार किया था। डॉ कफील बीआरडी अस्पताल में वॉर्ड सुपरिंटेंडेंट थे।

डॉ कफील को सितंबर 2017 में एसटीएफ ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनपर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409, 308 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ जिन आरोपों में मामला दर्ज था उसके अनुसार उनमे उम्रकैद की सजा का प्रावधान होता है। पिछले सात महीनो में डॉ कफील के परिवार ने कई बार ज़मानत याचिकाए दी थी। इन याचिकाओं को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था इसके बाद परिवार ने इलाहबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अब उन्हें ज़मानत मिल गई है।

करीब एक सप्ताह पहले डॉ. कफील खान ने जेल से 10 पन्नों का एक खत लिखा था। इस खत में उन्होंने लिखा था कि बड़े स्तर पर हुई प्रशासनिक नाकामी के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है। 18 अप्रैल को लिखा गया ये खत उनकी पत्नी शबिस्ता ने बीते शनिवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पूरी मीडिया को जारी किया था। उन्होंने खत में लिखा था, ’10 अगस्त की उस भयानक रात जब वॉट्सएप पर मुझे ऑक्सीजन खत्म होने की खबर मिली, तो फौरन मैंने वो सब किया जो एक डॉक्टर, पिता और देश के जिम्मेदार नागरिक को करना चाहिए।’ ‘ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे बच्चों को बचाने की मैंने पूरी कोशिश की। मैंने सभी लोगों को फोन किया, मैंने खुद ऑक्सीजन का ऑर्डर किया. मुझसे जो कुछ हो सकता था, मैंने वो सब किया। मैंने एचओडी, बीआरडी के प्रिंसिपल, एक्टिंग प्रिंसिपल, गोरखपुर के डीएम सभी को कॉल किया। सभी को स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया. मैंने अपने दोस्तों को भी फोन कर उनसे मदद ली। बच्चों की जान बचाने के लिए मैंने गैस सिलेंडर सप्लायर से मिन्नतें तक की थीं। मैंने कुछ पैसों का इंतजाम कर कहा कि बाकी पैसा सिलेंडर मिल जाने के बाद पे कर दिया जाएगा। मैं बच्चों को बचाने के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड भाग रहा था. पूरी कोशिश कर रहा था कि कहीं भी ऑक्सीजन सप्लाई की कमी न हो।’

कफील ने बताया कि 13 अगस्त की सुबह योगी महाराज अस्पताल आए थे. उन्होंने उनसे पूछा कि क्या आप ही डॉ. कफील हैं, जिन्होंने सिलेंडर का इंतजाम किया? मैंने हां कहा तो वे मुझ पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि सिलेंडर का इंतजाम कर लेने से आपको लग रहा कि आप हीरो बन जाएंगे? मैं इसे देखता हूं। योगी जी बहुत गुस्से में थे. ‘उनको लग रहा था कि मेरी वजह से ये मामला मीडिया में गया है। मैंने उनसे कहा कि मीडिया को कुछ भी नहीं बताया था, बल्कि वे तो खुद पहुंच गए थे। इसके बाद से मेरे परिवार को तंग किया जाने लगा। पुलिस घर आने लगी। मुझे धमकी दी जाने लगी। मेरा परिवार इन सब बातों से बुरी तरह डर गया था। परिवार को बचाने के लिए मैंने सरेंडर किया। मुझे लगा कि जब मैंने कुछ गलत नहीं किया तो मुझे कैसा डर? मुझे लगा कि इंसाफ मिलेगा, लेकिन कई महीने बीत गए. मुझे लग रहा था कि मुझे बेल मिल जाएगी, लेकिन अब मुझे लग रहा कि न्यायपालिका दबाव में काम कर रही है। मेरे परिवार की भी जिंदगी नर्क बन गई है। मेरी बेटी एक साल 7 महीने की हो गई है. मैं उसका जन्मदिन भी नहीं मना सका।’